Find your next favourite story.

    Novel Grove

    Stories 15
    Chapters 372
    Words 1.3 M
    Comments 0
    Reading 4 days, 8 hours4 d, 8 h
    • पाठ-खंड 25 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — गायत्री उन महिलाओं में थी जिनके चरित्र में रमणीयता और लालित्य के साथ पुरुषों का साहस और धैर्य भी मिला होता है। यदि वह कंघी और आईने पर जान देती थी तो कच्ची सड़कों के गर्द और धूल से भी न भागती थी।…
    • पाठ-खंड 26 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — मुंशी जी धीरे-धीरे सामने आकर बोले, हुजूर जनेऊ की सौगन्ध है, जब से सरकार ने मना कर दिया मैंने उसकी सूरत तक न देखी। यह कहते हुए उन्होंने अपने साहित्य-प्रेम का परिचय देने के लिए पत्रिका उठा ली और पन्ने…
    • पाठ-खंड 27 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — प्रेम-तो तुम्हारा गोरखपुर जाने का कब तक इरादा है? ज्ञान-पहले आप मुझे इसका पूरा विश्वास दिला दें कि लखनपुर के सम्बन्ध में आपने जो कहा है वह निश्चयात्मक है। प्रेम-उसे तुम अटल समझो। मैंने तुमसे एक बार…
    • पाठ-खंड 28 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — विद्या-यह उनकी सज्जनता है। यह आवश्यक नहीं कि वह आपके लिए दूसरों पर अन्याय करें। ज्ञान-यही बात मैं उनके मुँह से सुनना चाहता हूँ। इसका मुँहतोड़ जवाब मेरे पास है। विद्या-अच्छा तो जाओ, जो जी में आये…
    • पाठ-खंड 29 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — ज्वालासिंह कुर्सी पर बैठते हुए बोले, लीजिए, आपकी तो बोहनी हो गयी, घाटे में तो हम ही रहे। उस पर भी आप जमींदारी पेशे की निन्दा करते हैं। प्रेमशंकर ने कहा, देवी के नाम से ईंट-पत्थर भी तो पूजे जाते…
    • पाठ-खंड 30 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — शील-तो तुम कुछ रुपये क्यों नहीं दे देते? ज्वाला-वाह, जिस अन्याय से भागता हूँ, वही करूँ। शील-प्रेमशंकर जी बड़े दयालु हैं। उनके पास रुपये हों तो वह खेतिहारों की मदद करें। ज्वाला-मेरे विचार से वह इस…
    • पाठ-खंड 31 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — ज्ञानशंकर को अपील सफल होने का पूरा विश्वास था। उन्हें मालूम था कि किसानों में धनाभाव के कारण अब बिल्कुल दम नहीं है। लेकिन जब उन्होंने देखा, काश्तकारों की ओर से भी मुकदमे की पैरवी उत्तम रीति से की…
    • अध्याय 52 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — पंडित पद्मसिंह के चार-पांच मास के सदुद्योग का यह फल हुआ कि बीस-पच्‍चीस वेश्‍याओं ने अपनी लड़कियों को अनाथालय में भेजना स्‍वीकार कर लिया। तीन वेश्‍याओं ने अपनी सारी संपत्ति अनाथालय के निमित्त…
    • अध्याय 53 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — पंडित मदनसिंह की कई महीने तक यह दशा थी कि जो कोई उनके पास आता, उसी से सदन की बुराई करते-कपूत है, भ्रष्‍ट है, शोहदा है, लुच्‍चा है, एक कानी कौड़ी तो दूंगा नहीं, भीख मांगता फिरेगा, तब आटे-दाल का भाव मालूम…
    • अध्याय 54 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — जिस प्रकार कोई मनुष्‍य लोभ के वश होकर आभूषण चुरा लेता है, पर विवेक होने पर उसे देखने में भी लज्‍जा आती है, उसी प्रकार सदन भी सुमन से बचता फिर ता था। इतना ही नहीं, वह उसे नीची दृष्टि से देखता था और उसकी…
    • अध्याय 55 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — संध्‍या का समय है। आकाश पर लालिमा छाई हुई है और मंद वायु गंगा की लहरों पर क्रीड़ा कर रही है, उन्‍हें गुदगुदा रही है। वह अपने करुण नेत्रों से मुस्‍कराती है और कभी-कभी खिलखिलाकर हंस पड़ती है, तब उसके…
    • अध्याय 56 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — एक सल बीत गया। पंडित मदनसिंह पहले तीर्थ यात्रा पर उधार खाए बैठे थे। जान पड़ता था, सदन के घर आते ही एक दिन भी न ठहरेंगे, सीधे बद्रीनाथ पहुँचकर दम लेंगे, पर जब से मदन आ गया है, उन्‍होंने भूलकर भी…
    Note