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    Novel Grove

    Stories 15
    Chapters 372
    Words 1.3 M
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    Reading 4 days, 8 hours4 d, 8 h
    • पाठ-खंड 12 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — इतने में एक चपरासी ने कहा, चलिए आपको सरकार याद करते हैं। ईज़ाद हुसेन पान खाए हुए थे। तुरन्त कुल्ली की, पगड़ी बाँधी और ज्वालासिंह के सामने जाकर सलाम किया। ज्वालासिंह ने कहा, मीर साहब, चपरासियों को…
    • अध्याय 32 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — जिस प्रकार कोई आलसी मनुष्‍य किसी के पुकारने की आवाज सुनकर जाग जाता है, किंतु इधर-उधर देखकर फिर निद्रा में मग्‍न हो जाता है, उसी प्रकार पंडित कृष्‍णचन्‍द्र क्रोध और ग्‍लानि का आवेश शांत होने पर…
    • अध्याय 33 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सदन के विवाह का दिन आ गया। चुनार से बारात अमोला चली। उसकी तैयारियों का वर्णन करना व्‍यर्थ है। जैसी अन्‍य बारातें होती हैं, वैसी ही यह भी थी। वैभव और दरिद्रता का अत्‍यंत करुणात्‍मक दृश्‍य था।…
    • अध्याय 34 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — विट्ठलदास ने सुमन को विधवाश्रम में गुप्‍त रीति से रखा था। प्रबंधकारिणी सभा के किसी भी सदस्‍य को इत्तिला न दी थी। आश्रम की विधवाओं से उसे विधवा बताया था। लेकिन अबुलवफा जैसे टोहियों से यह बात बहुत…
    • अध्याय 35 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — यद्यपि डॉक्‍टर साहब का बंगला निकट ही था, पर इन दोनों आदमियों ने एक किराए की गाड़ी की। डॉक्‍टर साहब के यहाँ पैदल जाना फैशन के विरुद्ध था। रास्‍ते में विट्ठलदास ने आज के सारे समाचार बढ़ा-चढ़ाकर बयान…
    • अध्याय 36 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सदर जब घर पर पहुंचा, तो उसके मन की दशा उस मनुष्‍य की-सी थी, जो बरसों की कमाई लिए, मन में सहस्‍त्रों मंसूबे बांधता, हर्ष की उल्‍लासित घर आए और यहाँ संदूक खोलने पर उसे मालूम हो कि थैली खाली पड़ी…
    • अध्याय 37 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सदन को व्‍याख्‍यानों की ऐसी चाट पड़ी कि जहां कहीं व्‍याख्‍यान की खबर पाता, वहाँ अवश्‍य जाता। दोनों पक्षों की बातें महीनों सुनने और उन पर विचार करने से उसमें राय स्थिर करने की योग्‍यता आने लगी। अब…
    • अध्याय 38 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — जिस दिन से बारात लौट गई, उसी दिन से कृष्‍णचन्‍द्र फिर घर से बाहर नहीं निकले। मन मारे हुए अपने कमरे में बैठे रहते। उन्‍हें अब किसी को अपना मुँह दिखाते लज्‍जा आती थी। दुश्‍चरित्रा सुमन ने उन्‍हें…
    • अध्याय 39 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — प्रात:काल यह शोक-समाचार अमोला में फैला गया। इने-गिने सज्‍जनों को छोड़कर कोई भी उमानाथ के दूर पर समवेदना प्रकट करने न आया। स्‍वाभाविक मृत्‍यु हुई होती, तो संभवत: उनके शत्रु भी आकर चार आंसू बहा जाते,…
    • अध्याय 40 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — पद्मसिंह का पहला विवाह उस समय हुआ था, जब वह कॉलेज में पढ़ते थे, और एम.ए. पास हुए, तो वह एक पुत्र के पिता थे। पर बालिका वधू शिशु-पालन का मर्म न जानती थी। बालक जन्‍म के समय तो ह्रष्‍ट-पुष्‍ट था, पर पीछे…
    • अध्याय 41 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — जब हम स्‍वास्थ्य-लाभ करने के लिए किसी पहाड़ पर जाते हैं, तो इस बात का विशेष यत्‍न करते हैं कि हमसे कोई कुपथ्‍य न हो। नियमित रूप से व्‍यायाम करते हैं, आरोग्‍य का उद्देश्‍य सदैव हमारे सामने रहता है।…
    • अध्याय 42 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — शान्‍ता ने पत्र भेजा, पर उसको उत्तर आने की कोई आशा न थी। तीन दिन बीत गए, उसका नैराश्‍य दिनों-दिन बढ़ता जा रहा था। अगर कुछ अनुकूल उत्तर न आया, तो उमानाथ अवश्‍य ही उसका विवाह कर देंगे, यह सोचकर शान्‍ता…
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