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    26 Results with the "Literary Fiction" genre


    • अध्याय २१ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   इक्कीसवाँ परिच्छेद रूक्मिणी ने निर्मला से त्योरियाँ बदल कर कहा-क्या नङ्गे पाँव ही मदरसे जायगा? निर्मला ने बच्ची के बाल गूँथते हुए कहा-मैं क्या करूँ,मेरे पास रुपए नहीं हैं। रुक्मिणी-गहने…
    • अध्याय २० Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   बीसवाँ परिच्छेद चिन्ता में नींद कब आती है! निर्मला चारपाई पर पड़ी करवटें बदल रही थी। कितना चाहती थी कि नींद आ जाय; पर नींद ने आने की कसम सी खाली थी। चिराग बुझा दिया था, खिड़की के दरवाजे खोल दिये थे,…
    • अध्याय २ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   दूसरा परिच्छेद बाबू उदयभानुलाल का मकान बाज़ार में बना हुआ है। बरामदे में सुनार के हथौड़े, और कमरे में दर्ज़ी की सुइयाँ चल रही हैं। सामने नीम के नीचे बढ़ई चारपाइयाँ बना रहा है। खपरैल में हलवाई…
    • अध्याय १९ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   उन्नीसवाँ परिच्छेद अब की सुधा के साथ निर्मला को भी आना पड़ा। वह तो मैके में कुछ दिन और रहना चाहती थी, लेकिन शोकातुरा सुधा अकेले कैसे रहती। उसकी खातिर आना ही पड़ा। रुक्मिणी ने भुङ्गी से कहा-देखती…
    • अध्याय १८ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   अठारहवाँ परिच्छेद जब हमारे ऊपर कोई बड़ी विपत्ति आ पड़ती है, तो उससे हमें केवल दुख ही नहीं होता—हमें दूसरों के ताने भी सहने पड़ते हैं। जनता को हमारे ऊपर टिप्पणियाँ करने का वह सुअवसर मिल जाता है,…
    • अध्याय १७ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   सत्रहवाँ परिच्छेद कृष्णा के विवाह के बाद सुधा चली गई; लेकिन निर्मला मैके ही में रह गई। वकील साहब बार-बार लिखते थे; पर वह न जाती थी। वहाँ जाने को उसका जी ही न चाहता था। वहाँ कोई ऐसी चीज़ न थी, जो उसे…
    • अध्याय १६ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   सोलहवाँ परिच्छेद महीना कटते देर न लगी! विवाह का शुभमुहूर्त आ पहुँचा! मेहमानों से घर भर गया। मुन्शी तोताराम एक दिन पहले ही आ गए; और उनके साथ निर्मला की सहेली भी आई। निर्मला ने तो बहुत आग्रह न किया…
    • अध्याय १५ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   पन्द्रहवाँ परिच्छेद निर्मला को यद्यपि अपने ही घर के झञ्झटों से अवकाश न था; पर कृष्णा के विवाह का सन्देशा पाकर वह किसी तरह न रुक सकी। उसकी माता ने बहुत आग्रह करके बुलाया था। सबसे बड़ा आकर्षण यह…
    • अध्याय १४ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   चौदहवाँ परिच्छेद तीनों बातें एक ही साथ हुईं—निर्मला की कन्या ने जन्म लिया, कृष्णा का विवाह निश्चित हुआ; और मुन्शी तोताराम का मकान नीलाम हो गया! कन्या का जन्म तो साधारण बात थी! यद्यपि निर्मला की…
    • अध्याय १३ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   तेरहवां परिच्छेद जो कुछ होना था हो गया, किसी की कुछ न चली डॉक्टर साहब निर्मला की देह से रक्त निकालने की चेष्टा कर ही रहे थे कि मन्साराम अपने उज्ज्वल चरित्र की अन्तिम झलक दिखा कर इस भ्रम-लोक से…
    • अध्याय १२ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   बारहवाँ परिच्छेद तीन दिन गुज़र गए; और मुन्शी जी घर न आए! रुक्मिणी दोनों वक्त अस्पताल जाती; और मन्साराम को देख आती थी। दोनों लड़के भी जाते थे; पर निर्मला कैसे जाती? उसके पैरों में तो बेड़ियाँ पड़ी…
    • अध्याय ११ Cover
      by प्रेमचंद · Premchand —   ग्यारहवाँ परिच्छेद मुन्शी तोताराम सन्ध्या समय कचहरी से घर पहुँचे, तो निर्मला ने पूछा—उन्हें देखा, क्या हाल है? मुन्शी जी ने देखा कि निर्मला के मुख पर नाममात्र को भी शोक या चिन्ता का चिह्न नहीं…
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