26 Results with the "Literary Fiction" genre
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Chapter
अध्याय १४
चौदहवाँ परिच्छेद तीनों बातें एक ही साथ हुईं—निर्मला की कन्या ने जन्म लिया, कृष्णा का विवाह निश्चित हुआ; और मुन्शी तोताराम का मकान नीलाम हो गया! कन्या का जन्म तो साधारण बात थी! यद्यपि निर्मला की…-
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Story
निर्मला · Nirmala
प्रेमचंद का सामाजिक उपन्यास, जिसमें निर्मला के जीवन के माध्यम से दहेज, बेमेल विवाह और पारिवारिक अविश्वास के प्रभाव सामने आते हैं। Read the Hindi original of Premchand’s moving novel about marriage, dowry, and the consequences of mistrust.-
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Chapter
अध्याय १२
बारहवाँ परिच्छेद तीन दिन गुज़र गए; और मुन्शी जी घर न आए! रुक्मिणी दोनों वक्त अस्पताल जाती; और मन्साराम को देख आती थी। दोनों लड़के भी जाते थे; पर निर्मला कैसे जाती? उसके पैरों में तो बेड़ियाँ पड़ी…-
99.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय ११
ग्यारहवाँ परिच्छेद मुन्शी तोताराम सन्ध्या समय कचहरी से घर पहुँचे, तो निर्मला ने पूछा—उन्हें देखा, क्या हाल है? मुन्शी जी ने देखा कि निर्मला के मुख पर नाममात्र को भी शोक या चिन्ता का चिह्न नहीं…-
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Chapter
अध्याय १०
दसवाँ परिच्छेद मन्साराम दो दिन तक गहरी चिन्ता में डूबा रहा। बार-बार अपनी माता की याद आती; न खाना अच्छा लगता, न पढ़ने ही में जी लगता। उसकी काया-पलट सी हो गई। दो दिन गुज़र गए और छात्रालय में रहते हुए…-
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Chapter
अध्याय ९
नवाँ परिच्छेद मन्साराम के जाने से घर सूना हो गया। दोनों छोटे लड़के उसी स्कूल में पढ़ते थे। निर्मला रोज़ उनसे मन्साराम का हाल पूछती। आशा थी कि छुट्टी के दिन वह आएगा; लेकिन जब छुट्टी के दिन गुज़र…-
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Chapter
अध्याय ८
आठवां परिच्छेद जब कोई बात हमारी आशा के विरुद्ध होती है, तभी दुख होता है। मन्साराम को निर्मला से कभी इस बात की आशा न थी कि वह उसकी शिकायत करेगी। इसीलिए उसे घोर वेदना हो रही थी। यह क्यों मेरी शिकायत…-
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Chapter
अध्याय ७
सातवाँ परिच्छेद उस दिन से निर्मला का रङ्ग-ढङ्ग बदलने लगा। उसने अपने को कर्त्तव्य पर मिटा देने का निश्चय कर लिया। अब तक नैराश्य के सन्ताप में उसने कर्त्तव्य पर ध्यान ही न दिया था। उसके हृदय में…-
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Chapter
अध्याय ६
छठा परिच्छेद उस दिन अपने प्रगाढ़ प्रणय का सबल प्रमाण देने के बाद मुन्शी तोताराम को आशा हुई थी कि निर्मला के मर्मस्थल पर मेरा सिक्का जम जायगा; लेकिन उनकी यह आशा लेशमात्र भी पूरी न हुई; बल्कि पहले…-
99.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय ५
पाँचवाँ परिच्छेद निर्मला का विवाह हो गया। ससुराल आ गई। वकील साहब का नाम था मुन्शी तोताराम। साँवले रङ्ग के मोटे-ताज़े आदमी थे। उम्र तो अभी चालीस से अधिक न थी, पर वकालत के कठिन परिश्रम ने सिर के…-
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Chapter
अध्याय ४
चौथा परिच्छेद कल्याणी के सामने अब एक विषम समस्या आ खड़ी हुई। पति के देहान्त के बाद उसे अपनी दुरावस्था का यह पहला और बहुत ही कड़वा अनुभव हुआ। दरिद्र विधवा के लिए इससे बड़ी और क्या विपत्ति हो सकती…-
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Chapter
अध्याय ३
तीसरा परिच्छेद विधवा का विलाप और अनाथों का रोना सुना कर हम पाठकों का दिल न दुखाएँगे। जिसके ऊपर पड़ती है, वह रोता है, विलाप करता है, पछाड़ें खाता है। यह कोई नई बात नहीं। हाँ, अगर आप चाहें तो कल्याणी…-
99.6 K • Completed
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