81 Results with the "Rural fiction" genre
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Chapter
पाठ-खंड 5
ज्ञानशंकर बगलें झाँक रहे थे कि बड़ी बहू बोल उठी, यह जा चुके। लल्लू कहते थे कि ज्ञान झूठ भी जाकर कुछ कह दें तो सारा काम बन जाए, लेकिन इन्हें क्या परवाह है, चाहे कोई चूल्हे भाड़ में जाए। फँसाना होता तो…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 49
अमजद-मैंने तो कसम खा ली है। ईजाद-अरे मियाँ कैसी बातें करते हो? ऐसी कस्में दिन में सैकड़ों बार खाया करते हैं। जाइए देखिए, फिर कोई शैतान आया है। मियाँ अमजद नीचे आये तो सचमुच एक शैतान खड़ा था। ठिगना कद,…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 48
डॉक्टर-आप मुतलक अन्देशा न करें, मैंने मुकदमे को हाथ में ले लिया। अपने दीवान साहब को भेज दीजिएगा, वकालतनामा तैयार हो जायगा। मैं कागजात देखकर फौरन दावा दायर कर दूँगा। गोरखपुर गया तो आपके कागजात…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 47
चौधरी-दीनों पर दया करो और वहीं पुण्य तुम्हें गड्ढे से निकालेगा। दया ही सब मन्त्रों का मूल है। फैजू मियाँ गर्द झाड़ कर उठ बैठे थे। वृद्ध दुर्बल चौधरी उस समय उनकी आँखों में एक देव-सा दीख पड़ता था। यह…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 46
सुक्खू का एक-एक शब्द वीर रस में डूबा हुआ था। बिलासी के हृदय में यह गुदगुदी हो रही थी, जो अपनी सराहना सुनकर हो सकती है। जी चाहता था, सुक्खू के चरणों पर सिर रख दूँ, किन्तु अन्य स्त्रियाँ सुक्खू की ओर…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 45
अदालत उठी। यह दुखियारे हवालात चले। और सभी ने तो मन को समझ लिया था कि भाग्य में जो कछ बदा है वह हो कर रहेगा, पर दुखरन भगत की छाती पा साँप लोटता रहता था। उसे रह-रह कर उत्तेजना होती थी कि अवसर पाऊँ तो…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 44
प्रस्तुत प्रश्न को यह नया स्वरूप दे कर ज्ञानशंकर विदा हुए। यद्यपि हत्या के सम्बन्ध में डॉक्टर साहब की अब भी वही राय थी; लेकिन अब यह गुनाह बेलज्जत न था। 500 रुपये का पारितोषिक 100 रुपये फीस, साल में…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 43
प्रेम-वे पवित्र आत्माएँ अब संसार से उठती जाती हैं। अब तो जिधर देखिए उधर स्वार्थ सेवा का आधिपत्य है। चचा साहब जैसा भोजन करते हैं, वैसा अच्छे-अच्छे रईसों को भी मयस्सर नहीं होता। वह स्वयं पाक-शास्त्र…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 42
प्रेमशंकर-आप शौक से आइए, लेकिन खूब दृढ़ हो कर आइएगा। ज्वालासिंह-अगर कुछ कोर-कसर होगी तो यहाँ पूरी हो जायगी। प्रेमशंकर ने अपने आदमियों से खेती-बारी के सम्बन्ध में कुछ बातें की और 8 बजते-बजते लाला…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 41
सरकारी वकील ने पूछा, आपको मालूम है कि प्रेमशंकर उस गाँव में अक्सर आया-जाया करते थे। ज्ञान-उनका उस गाँव में आधा हिस्सा है। वकील-आप जानते हैं कि जब इन्स्पेक्टर जनरल पुलिस का दौरा हुआ था तब प्रेमशंकर…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 40
लाला प्रभाशंकर ने सुना तो उन्मत्त की भाँति दौड़े हुए ज्ञानशंकर के पास जाकर बोले, बेटा, तुमने सुना ही होगा। कुल मर्यादा मिट्टी में मिल गयी। (रोकर) भैया की आत्मा को इस समय कितना दुःख हो रहा होगा।'…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 4
ज्वालासिंह ने दिलासा दिया, नहीं साहब, आप घर के मालिक है, यह आपकी गोद के पाले हुए लड़के हैं, इनकी अबोध बातों पर ध्यान न दीजिए। इसकी भूल है जो कहते हैं कि आपका कोई अधिकार नहीं है। आपको सब कुछ अधिकार है,…-
304.7 K • Completed
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