81 Results with the "Rural fiction" genre
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Chapter
पाठ-खंड 24
यह इन्हीं विचारों में डूबे थे कि सामने से एक एक्का आता हुअद दिखाई दिया। पहले तो कई आदमियों ने एक्केवान को ललकारा। क्यों खेत में एक्का लाता है? आँखें फूटी हुई हैं? देखता नहीं, खेत बोया हुआ है? पर जब…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 25
गायत्री उन महिलाओं में थी जिनके चरित्र में रमणीयता और लालित्य के साथ पुरुषों का साहस और धैर्य भी मिला होता है। यदि वह कंघी और आईने पर जान देती थी तो कच्ची सड़कों के गर्द और धूल से भी न भागती थी।…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 26
मुंशी जी धीरे-धीरे सामने आकर बोले, हुजूर जनेऊ की सौगन्ध है, जब से सरकार ने मना कर दिया मैंने उसकी सूरत तक न देखी। यह कहते हुए उन्होंने अपने साहित्य-प्रेम का परिचय देने के लिए पत्रिका उठा ली और पन्ने…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 27
प्रेम-तो तुम्हारा गोरखपुर जाने का कब तक इरादा है? ज्ञान-पहले आप मुझे इसका पूरा विश्वास दिला दें कि लखनपुर के सम्बन्ध में आपने जो कहा है वह निश्चयात्मक है। प्रेम-उसे तुम अटल समझो। मैंने तुमसे एक बार…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 28
विद्या-यह उनकी सज्जनता है। यह आवश्यक नहीं कि वह आपके लिए दूसरों पर अन्याय करें। ज्ञान-यही बात मैं उनके मुँह से सुनना चाहता हूँ। इसका मुँहतोड़ जवाब मेरे पास है। विद्या-अच्छा तो जाओ, जो जी में आये…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 29
ज्वालासिंह कुर्सी पर बैठते हुए बोले, लीजिए, आपकी तो बोहनी हो गयी, घाटे में तो हम ही रहे। उस पर भी आप जमींदारी पेशे की निन्दा करते हैं। प्रेमशंकर ने कहा, देवी के नाम से ईंट-पत्थर भी तो पूजे जाते…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 30
शील-तो तुम कुछ रुपये क्यों नहीं दे देते? ज्वाला-वाह, जिस अन्याय से भागता हूँ, वही करूँ। शील-प्रेमशंकर जी बड़े दयालु हैं। उनके पास रुपये हों तो वह खेतिहारों की मदद करें। ज्वाला-मेरे विचार से वह इस…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 31
ज्ञानशंकर को अपील सफल होने का पूरा विश्वास था। उन्हें मालूम था कि किसानों में धनाभाव के कारण अब बिल्कुल दम नहीं है। लेकिन जब उन्होंने देखा, काश्तकारों की ओर से भी मुकदमे की पैरवी उत्तम रीति से की…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 22
भाई के साथ तो यह व्यवहार था, और विरादरी के नेताओं के पास आकर प्रेमशंकर के झूठे आक्षेप करते, वह देवताओं को गालियाँ देते हैं, कहते हैं मांस सब एक है, चाहे किसी का हो। खाना खाकर कभी हाथ-मुँह तक नहीं धोते,…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 1
सन्ध्या हो गई है। दिन भर के थके-माँदे बैल खेत से आ गए हैं। घरों से धुएँ के काले बादल उठने लगे। लखनपुर में आज परगने के हाकिम की परताल थी। गाँव के नेतागण दिन भर उनके घोड़े के पीछे-पीछे दौड़ते रहे थे। इस…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 2
ज्ञानशंकर के हृदय में भावी उन्नति की बड़ी-बड़ी अभिलाषाएँ थीं। वह अपने परिवार को फिर समृद्धि और सम्मान के शिखर पर ले जाना चाहते थे। घोड़े और फिटन की उन्हें बड़ी-बड़ी आकांक्षा थी। वह शान से फिटन पर…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 3
यह कहकर गौस खाँ टाँगन पर सवार होने चले। बिलासी रोती हुई उनके सामने हाथ बाँधकर खड़ी हो गई और बोली, सरकार कहीं की न रहूँगी। जो डाँड़ चाहें लगा दीजिए, जो सजा चाहे दीजिए, मालिकों के कान में यह बात न…-
304.7 K • Completed
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