168 Results with the "Social drama" genre
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Chapter
अध्याय 16
महाशय विट्ठलदास इस समय ऐसे खुश थे मानो उन्हें कोई संपत्ति मिल गई हो। उन्हें विश्वास था कि पद्मसिंह इस जरा से कष्ट से मुँह न मोड़ेंगे, केवल उनके पास जाने की देर है। वह होली के कई दिन पहले से…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 16
संध्या हो गयी है। ऐसी उमस है कि सांस लेना कठिन है, और जेल की कोठरियों में यह उमस और भी असह्य हो गई है। एक भी खिड़की नहीं; एक भी जंगला नहीं। उस पर मच्छरों का निरंतर गान कानों के परदे फाड़े डालता है।…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 16
शहर में घर-घर, गली-कूचे, जहाँ देखिए यही चर्चा थी! बाबू दाननाथ का नाम भी प्रसंग से लोगों की जबान पर आ जाता था। जो व्यक्ति कमलाप्रसाद की नाक का बाल - आठों पहर का साथी हो, वह क्या इस कुचक्र से बिल्कुल अलग…-
81.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय 15
प्राचीन ऋषियों ने इंद्रियों को दमन करने के दो साधन बताए हैं --एक राग, दूसरा वैराग्य। पहला साधन अत्यंत कठिन और दुस्साध्य है। लेकिन हमारे नागरिक समाज ने अपने मुख्य स्थानों पर मीनाबाजार सजाकर…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 15
राजाओं-महाराजाओं को क्रोध आता है, तो उनके सामने जाने की हिम्मत नहीं पड़ती। जाने क्या गजब हो जाए, क्या आफत आ जाए। विशालसिंह किसी को फांसी न दे सकते थे, यहां तक कि कानून की रू से वह किसी को गालियां भी न…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 15
दाननाथ यहाँ से चले, तो उनके जी में ऐसा आ रहा था कि इसी वक्त घर-बार छोड़ कर कहीं निकल जाऊँ! कमलाप्रसाद अपने साथ उन्हें भी ले डूबा था। जनता की दृष्टि में कमलाप्रसाद और वह अभिन्न थे। यह असंभव था कि उनमें…-
81.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय 14
दूसरे दिन पद्मसिंह सदन को साथ लेकर किसी स्कूल में दाखिल कराने चले। किंतु जहां गए, साफ जवाब मिला 'स्थान नहीं है। ' शहर में बारह पाठशालाएं थीं लेकिन सदन के लिए कहीं स्थान न था। शर्माजी ने विवश…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 14
गद्दी के कई दिन पहले ही से मेहमानों का आना शुरू हो गया और तीन दिन बाकी ही थे कि सारा कैंप भर गया। दीवान साहब ने कैंप ही में बाजार लगवा दिया था, वहीं रसद-पानी का भी इंतजाम था। राजा साहब स्वयं मेहमानों…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 14
बाबू दाननाथ के स्वभाव में मध्यम न था। वह जिससे मित्रता करते थे, उसके दास बन जाते थे, उसी भाँति जिसका विरोध करते थे, उसे मिट्टी में मिला देना चाहते थे। कई महीने तक वह कमलाप्रसाद के मित्र बने रहे। बस,…-
81.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय 13
सुमन के चले जाने के बाद पद्मसिंह के ह्रदय में एक आत्मग्लानि उत्पन्न हुई। मैंने अच्छा नहीं किया। न मालूम वह कहां गई तो पूछना ही क्या, किंतु वहाँ वह कदापि न गई होगी। मरता क्या न करता, कहीं…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 13
मुद्दत के बाद जगदीशपुर के भाग जागे। राजभवन आबाद हुआ। बरसात में मकानों की मरम्मत न हो सकती थी, इसलिए क्वार तक शहर ही में गुजारा करना पड़ा। कार्तिक लगते ही एक ओर जगदीशपुर के राजभवन की मरम्मत होने…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 13
इस वक्त पूर्णा को अपनी उद्दंडता पर पश्चाताप हुआ। उसने अगर जरा धैर्य से काम लिया होता तो कमलाप्रसाद कभी ऐसी शरारत न करता। कौशल से काम निकल सकता था, लेकिन होनहार को कौन टाल सकता है? मगर अच्छा ही हुआ।…-
81.6 K • Completed
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