168 Results with the "Social drama" genre
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Chapter
अध्याय 16
शहर में घर-घर, गली-कूचे, जहाँ देखिए यही चर्चा थी! बाबू दाननाथ का नाम भी प्रसंग से लोगों की जबान पर आ जाता था। जो व्यक्ति कमलाप्रसाद की नाक का बाल - आठों पहर का साथी हो, वह क्या इस कुचक्र से बिल्कुल अलग…-
81.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय 17
दाननाथ जब अमृतराय के बँगले के पास पहुँचे तो सहसा उनके कदम रुक गए, हाते के अंदर जाते हुए लज्जा आई। अमृतराय अपने मन में क्या कहेंगे? उन्हें यही खयाल होगा कि जब चारों तरफ ठोकरें खा चुके और किसी ने साथ न…-
81.6 K • Completed
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Chapter
अध्याय 18
दोनों मित्र आश्रम की सैर करने चले। अमृतराय ने नदी के किनारे असी-संगम के निकट पचास एकड़ जमीन ले ली थी। वहाँ रहते भी थे। अपना कैंटोमेंट वाला बँगला बेच डाला था। आश्रम ही के हाते में एक छोटा-सा मकान अपने…-
81.6 K • Completed
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Chapter
खंड 1 · अध्याय 1
प्रतिष्ठान के खँडहर में और गंगा-तट की सिकता-भूमि में अनेक शिविर और फूस के झोंपड़े खड़े हैं। माघ की अमावस्या की गोधूली में प्रयाग में बाँध पर प्रभात का-सा जनरव और कोलाहल तथा धर्म लूटने की धूम कम हो…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 1 · अध्याय 2
लखनऊ संयुक्तप्रान्त में एक निराला नगर है। बिजली के प्रभा से आलोकित सन्ध्या 'शाम-अवध' की सम्पूर्ण प्रतिभा है। पण्य में क्रय-विक्रय चल रहा है; नीचे और ऊपर से सुन्दरियों का कटाक्ष। चमकीली…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 1 · अध्याय 3
हरद्वार की बस्ती से अलग गंगा के तट पर एक छोटा-सा उपवन है। दो-तीन कमरे और दालानों का उससे लगा हुआ छोटा-सा घर है। दालान में बैठी हुई तारा माँग सँवार रही है। अपनी दुबली-पतली लम्बी काया की छाया प्रभात के…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 1 · अध्याय 4
पहाड़ जैसे दिन बीतती ही न थे। दुःख की रातें जाड़े की रात से भी लम्बी बन जाती हैं। दुखिया तारा की अवस्था शोचनीय थी। मानसिक और आर्थिक चिंताओं से वह जर्जर हो गयी। गर्भ के बढ़ने से शरीर से भी कृश हो गयी।…-
113.0 K • Completed
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Story
कायाकल्प · Kayakalp
महत्त्वाकांक्षा, प्रेम और आत्मिक परिवर्तन की उलझी हुई यात्रा। A richly layered novel of ambition, love and spiritual transformation.-
1.6 K • New
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1.6 K • New
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2.0 K • New
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Chapter
अध्याय 48
अहिल्या के आने की खबर पाकर मुहल्ले की सैकड़ों औरतें टूट पड़ी। शहर के बड़े-बड़े घरों की स्त्रियां भी आ पहुंची। शाम तक तांता लगा रहा। कुछ लोग डेपुटेशन बनाकर संस्थाओं के लिए चंदै मांगने आ पहुंचे।…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 49
गाड़ी अंधकार को चीरती हुई चली जाती थी। सहसा शंखधर हर्षपुर' का नाम सुनकर चौंक पड़ा। वह भूल गया, मैं कहाँ जा रहा हूँ, किस काम से जा रहा हूँ और मेरे रुक जाने से कितना बड़ा अनर्थ जो जाएगा? किसी अज्ञात…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 50
राजा विशालसिंह की हिंसा-वृत्ति किसी प्रकार शांत न होती थी। ज्यों-ज्यों अपनी दशा पर उन्हें दुःख होता था, उनके अत्याचार और भी बढ़ते थे। उनके हृदय में अब सहानुभूति, प्रेम और धैर्य के लिए जरा भी स्थान…-
258.1 K • Completed
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Chapter
अध्याय 51
कमला को जगदीशपुर में आकर ऐसा मालूम हुआ कि वह एक युग के बाद अपने घर आई है। वहां की सभी चीजें, सभी प्राणी उसके जाने-पहचाने थे; पर अब उनमें कितना अंतर हो गया था। उसका विशाल नाचघर बिल्कुल बेमरम्मत पड़ा…-
258.1 K • Completed
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