168 Results with the "Social drama" genre
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Story
सेवासदन · Sevasadan
सुमन की कहानी के माध्यम से विवाह, सामाजिक प्रतिष्ठा और स्त्री की स्वतंत्रता पर एक मार्मिक उपन्यास। A searching portrait of marriage, respectability and a woman’s struggle for agency.-
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Story
प्रतिज्ञा · Pratigya
एक प्रतिज्ञा से बदलते संबंध और समाज की रूढ़ियों से टकराती मानवीय संवेदनाएँ। A promise tests friendship, marriage and the possibilities of social reform.-
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 9
किशोरी सन्तुष्ट न हो सकी। कुछ दिनों के लिए वह विजय को अवश्य भूल गयी थी; पर मोहन को दत्तक ले लेने से उसको एकदम भूल जाना असम्भव था। हाँ, उसकी स्मृति और भी उज्ज्वल हो चली। घर के एक-एक कोने उसकी कृतियों से…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 8
नियत दिन आ गया, आज उत्सव का विराट् आयोजन है। संघ के प्रांगण में वितान तना है। चारों ओर प्रकाश है। बहुत से दर्शकों की भीड़ है। गोस्वामी जी, निरंजन और मंगलदेव संघ की प्रतिमा के सामने बैठे हैं। एक ओर…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 7
आलोक-प्रार्थिनी अपने कुटीर में दीपक बुझाकर बैठी रही। उसे आशा थी कि वातायन और द्वारों से राशि-राशि प्रभात का धवल आनन्द उसके प्रकोष्ठ में भर जायेगा; पर जब समय आया, किरणें फूटी, तब उसने अपने वातायनों,…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 6
जज के साथ पाँच जूरी बैठे थे। सरकारी वकील ने अपना वक्तव्य समाप्त करते हुए कहा, 'जूरी सज्जनों से मेरी प्रार्थना है कि अपना मत देते हुए वे इस बात का ध्यान रखें कि वे लोग हत्या जैसे एक भीषण अपराध पर…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 5
कई दिन हो गये थे। मंगल नहीं था। अकेले गाला उस पाठशाला का प्रबन्ध कर रही थी। उसका जीवन उसे नित्य बल दे रहा था, पर उसे कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता कि उसने कोई वस्तु खो दी है। इधर एक पंडितजी उस पाठशाला में…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 4
कृष्णशरण की टेकरी ब्रज-भर में कुतूहल और सनसनी का केन्द्र बन रही थी। निरंजन के सहयोग से उसमें नवजीवन का संचार होने लगा, कुछ ही दिनों से सरला और लतिका भी उस विश्राम-भवन में आ गयी थीं। लतिका बड़े चाव से…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 3
एक दिन सवेरे की गाड़ी से वृन्दावन के स्टेशन पर नन्दो और घण्टी उतरीं। बाथम स्टेशन के समीप ही सड़क पर ईसाई-धर्म पर व्याख्यान दे रहा था- 'यह देवमन्दिरों की यात्राएँ तुम्हारे मन में क्या भावा लाती…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 2
मंगलदेव की पाठशाला में अब दो विभाग हैं-एक लड़कों का, दूसरा लड़कियों का। गाला लड़कियों की शिक्षा का प्रबन्ध करती। अब वह एक प्रभावशाली गम्भीर युवती दिखलाई पड़ती, जिसके चारों ओर पवित्रता और…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 10
बरसात के प्रारम्भिक दिन थे। संध्या होने में विलंब था। दशाश्वमेध घाट वाली चुंगी-चौकी से सटा हुआ जो पीपल का वृक्ष है, उसके नीचे कितने ही मनुष्य कहलाने वाले प्राणियों का ठिकाना है। पुण्य-स्नान करने…-
113.0 K • Completed
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Chapter
खंड 4 · अध्याय 1
वह दरिद्रता और अभाव के गार्हस्थ्य जीवन की कटुता में दुलारा गया था। उसकी माँ चाहती थी कि वह अपने हाथ से दो रोटी कमा लेने के योग्य बन जाए, इसलिए वह बार-बार झिड़की सुनता। जब क्रोध से उसके आँसू निकलते और…-
113.0 K • Completed
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