81 Results with the "Rural fiction" genre
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Chapter
पाठ-खंड 66
एक दिन वे एक पत्र लिये हुए गायत्री के पा आ कर बोले, गोरखपुर से यह बहुत जरूरी खत आया है। मुख्तार साहब ने लिखा है कि वे फसल के दिन हैं। आप लोगों का आना जरूरी है, नहीं तो सीर की उपज हाथ न लगेगी, नौकर-चाकर खा…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 67
जब वह मजिस्ट्रेट थे, तो उन्होंने अपने असामियों पर इजाफा लगान का दावा किया था। महीनों मेरी खुशामद करते रहे कि मैं बाबू जी से डिगरी करा दूँ। मैं क्या जानें, इनके चकमे में आ गयी। बाबू जी पहले तो बहुत…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 68
इस भाँति तीन-चार महीने बीत गये। भादों का महीना था। जन्माष्टमी आ रही थी। शहर में उत्सव मनाने की तैयारी हो रही थी। कई वर्षों से गायत्री के यहाँ उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता था। दूर-दूर से गवैये…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 69
माया-यदि उनकी यह इच्छा होती तो यह वह मुझे ताल्लुकेदारों के स्कूलों में नहीं भेज देती? मुझे आपकी सेवा में रखने से उनका उद्देश्य यही होगा कि मैं आपके ही पदचिह्न पर चलूँ। प्रेम-तो यह रुपये खर्च…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 70
थोड़ी देर अपील के विषय में परामर्श करने के बाद ज्वालासिंह मिर्जासाहब को साथ ले कर हाजीपुर चले। डॉक्टर साहब भी साथ हो लिये। ज्यों ही दशहरे की छुट्टियों के बाद हाईकोर्ट खुला, अपील दायर हो गयी और…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 61
गायत्री विस्मित हो कर विद्या का मुँह ताकने लगी। लेकिन ज्ञानशंकर मन में मुग्ध हुए जाते थे। दोनों बहिनों में वह जो भेद-भाव डालना चाहते थे वह आप में यहाँ अब आपको कष्ट होगा। क्यों न बैंगले में एक कमरा…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 40
लाला प्रभाशंकर ने सुना तो उन्मत्त की भाँति दौड़े हुए ज्ञानशंकर के पास जाकर बोले, बेटा, तुमने सुना ही होगा। कुल मर्यादा मिट्टी में मिल गयी। (रोकर) भैया की आत्मा को इस समय कितना दुःख हो रहा होगा।'…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 42
प्रेमशंकर-आप शौक से आइए, लेकिन खूब दृढ़ हो कर आइएगा। ज्वालासिंह-अगर कुछ कोर-कसर होगी तो यहाँ पूरी हो जायगी। प्रेमशंकर ने अपने आदमियों से खेती-बारी के सम्बन्ध में कुछ बातें की और 8 बजते-बजते लाला…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 43
प्रेम-वे पवित्र आत्माएँ अब संसार से उठती जाती हैं। अब तो जिधर देखिए उधर स्वार्थ सेवा का आधिपत्य है। चचा साहब जैसा भोजन करते हैं, वैसा अच्छे-अच्छे रईसों को भी मयस्सर नहीं होता। वह स्वयं पाक-शास्त्र…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 44
प्रस्तुत प्रश्न को यह नया स्वरूप दे कर ज्ञानशंकर विदा हुए। यद्यपि हत्या के सम्बन्ध में डॉक्टर साहब की अब भी वही राय थी; लेकिन अब यह गुनाह बेलज्जत न था। 500 रुपये का पारितोषिक 100 रुपये फीस, साल में…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 45
अदालत उठी। यह दुखियारे हवालात चले। और सभी ने तो मन को समझ लिया था कि भाग्य में जो कछ बदा है वह हो कर रहेगा, पर दुखरन भगत की छाती पा साँप लोटता रहता था। उसे रह-रह कर उत्तेजना होती थी कि अवसर पाऊँ तो…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 46
सुक्खू का एक-एक शब्द वीर रस में डूबा हुआ था। बिलासी के हृदय में यह गुदगुदी हो रही थी, जो अपनी सराहना सुनकर हो सकती है। जी चाहता था, सुक्खू के चरणों पर सिर रख दूँ, किन्तु अन्य स्त्रियाँ सुक्खू की ओर…-
304.7 K • Completed
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