81 Results with the "Rural fiction" genre
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Chapter
पाठ-खंड 4
ज्वालासिंह ने दिलासा दिया, नहीं साहब, आप घर के मालिक है, यह आपकी गोद के पाले हुए लड़के हैं, इनकी अबोध बातों पर ध्यान न दीजिए। इसकी भूल है जो कहते हैं कि आपका कोई अधिकार नहीं है। आपको सब कुछ अधिकार है,…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 5
ज्ञानशंकर बगलें झाँक रहे थे कि बड़ी बहू बोल उठी, यह जा चुके। लल्लू कहते थे कि ज्ञान झूठ भी जाकर कुछ कह दें तो सारा काम बन जाए, लेकिन इन्हें क्या परवाह है, चाहे कोई चूल्हे भाड़ में जाए। फँसाना होता तो…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 6
ज्वालासिंह ने स्थिति को खूब बढ़ाकर दर्शाया, क्योंकि इस विषय में वह ज्ञानशंकार के विचारों से परिचित थे। उनका अभिप्राय केवल यह था कि इस समय दयाशंकर के अभियोग की चर्चा न आने पाए। ज्ञानशंकर ने…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 7
ज्ञानशंकर-जरा ज्वालासिंह से मिलने गया था। विद्या-तुम्हारी ये बातें मुझे अच्छी नहीं लगती। ज्ञान-कौन-सी बातें? विद्या-यही, अपने घर के लोगों की हाकिमों से शिकायत करना। भाइयों में खटपट सभी जगह होती…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 8
ज्ञानशंकर पर इन विनयपूर्ण शब्दों का कुछ भी असर न हुआ। उनके विचार में यह विकृत भावुकता थी, जो मानसिक दुर्बलता का चिह्न है। हाँ, उस पर कृत्रिमता का सन्देह नहीं हो सकता था। उन्हें विश्वास हो गया कि…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 9
किन्तु कादिर निश्चित और निश्शंक अपने काम में लगा रहता था। उसे एक क्षण के लिए भी यह भय न होता था कि गाँव के जमींदार और कारिन्दा मेरे शत्रु हो रहे हैं और उनकी शत्रुता मेरा सर्वनाश कर सकती है। यदि इस…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 10
मनोहर-अबकी बेटी के ब्याह में इमली का पेड़ कटवाया था। क्या सब जल गई? डपट-नहीं बची तो बहुत थी, पर कल डिप्टी ज्वालासिंह के लश्कर में चली गई।-खाँ साहब से कितना कहा कि इसे मत ले जाइए, पर उनकी बला सुनती है।…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 11
बलराज अपने बाप के पीछे-पीछे घर पहुँचा। रास्ते में कोई बात-चीत नहीं हुई। बिलासी बलराज को देखकर बोली, कहाँ जाके बैठ रहे? तुम्हारे दादा कब से खोज रहे हैं। चलो रोटी तैयार है। बलराज-अखाड़े की ओर चला गया…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 12
इतने में एक चपरासी ने कहा, चलिए आपको सरकार याद करते हैं। ईज़ाद हुसेन पान खाए हुए थे। तुरन्त कुल्ली की, पगड़ी बाँधी और ज्वालासिंह के सामने जाकर सलाम किया। ज्वालासिंह ने कहा, मीर साहब, चपरासियों को…-
304.7 K • Completed
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