81 Results with the "Rural fiction" genre
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Chapter
पाठ-खंड 17
वह कह रही थीं कि यह अपमान मुझसे नहीं सहा जा सकता। मैं अब जान पर खेलता हूँ। आप क्या कहते हैं? मनोहर ने बेटे की यह दशा देखी तो रक्त खौल उठा। बावला हो गया। कुछ न सूझा कि मैं क्या कर रहा हूँ। बाज की तरह…-
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Chapter
पाठ-खंड 16
राय साहब-जिस काम में सेठ जगतराम और मिस्टर मनचूरजी शरीक हों उसके विषय में यह संदेह नहीं हो सकता। एजेण्ट-तो क्या आप समझते हैं कि कम्पनी का संचालन उत्तम रीति न होगा? राय साहब-कदापि नहीं? एजेण्ट-तो फिर…-
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Chapter
पाठ-खंड 15
गायत्री जरा सँभल गई, उसने ज्ञानशंकर की ओर सजल आँखों से देखा। कहना चाहती थी, जो कुछ तुमने किया उसका बदला तुम्हें परमात्मा देंगे। लेकिन यदि सौजन्यता का अल्पांश भी रह गया है तो मेरी लाज रखना, सतीत्व…-
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Chapter
पाठ-खंड 14
किन्तु उसका यह सरल-सीधा व्यवहार ज्ञानशंकर की मलिन दृष्टि में परिवर्तित हो जाता था। उज्ज्वलता में वैचित्र्य और समता में विषमता दीख पड़ती थी। उन्हें गायत्री संकेत द्वारा कहती हुई मालूम होती,…-
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Chapter
पाठ-खंड 13
ज्ञानशंकर-ईश्वर की लीला विचित्र है! प्रभाशंकर-अभी उम्र ही क्या थी! बिलकुल लड़का था। तुम्हारे विवाह में देखा था, चेहरे से तेज बरसता था। ऐसा प्रतापी लड़का मैंने नहीं देखा। ज्ञानशंकर-इसी से तो ईश्वर…-
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Chapter
पाठ-खंड 12
इतने में एक चपरासी ने कहा, चलिए आपको सरकार याद करते हैं। ईज़ाद हुसेन पान खाए हुए थे। तुरन्त कुल्ली की, पगड़ी बाँधी और ज्वालासिंह के सामने जाकर सलाम किया। ज्वालासिंह ने कहा, मीर साहब, चपरासियों को…-
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Chapter
पाठ-खंड 11
बलराज अपने बाप के पीछे-पीछे घर पहुँचा। रास्ते में कोई बात-चीत नहीं हुई। बिलासी बलराज को देखकर बोली, कहाँ जाके बैठ रहे? तुम्हारे दादा कब से खोज रहे हैं। चलो रोटी तैयार है। बलराज-अखाड़े की ओर चला गया…-
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Chapter
पाठ-खंड 10
मनोहर-अबकी बेटी के ब्याह में इमली का पेड़ कटवाया था। क्या सब जल गई? डपट-नहीं बची तो बहुत थी, पर कल डिप्टी ज्वालासिंह के लश्कर में चली गई।-खाँ साहब से कितना कहा कि इसे मत ले जाइए, पर उनकी बला सुनती है।…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 1
सन्ध्या हो गई है। दिन भर के थके-माँदे बैल खेत से आ गए हैं। घरों से धुएँ के काले बादल उठने लगे। लखनपुर में आज परगने के हाकिम की परताल थी। गाँव के नेतागण दिन भर उनके घोड़े के पीछे-पीछे दौड़ते रहे थे। इस…-
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