81 Results with the "Rural fiction" genre
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Chapter
पाठ-खंड 50
पंडित जी ने अपना रंग जमते न देखा तो अपनी वक्तृता समाप्त कर दी और जगह पर आ बैठे। श्रोताओं ने समझा अब इत्तहादियों के राग सुनने में आयेंगे। सबने कुर्सियाँ आगे खिसकायीं और सावधान हो बैठे किन्तु…-
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Chapter
पाठ-खंड 60
राधा-नदी में अथाह जल है। वैद्य-जिस के पास नौका है उसे जल का क्या भय? राधा-आँधी है, भयानक लहरें हैं और बड़े-बड़े भयंकर जलजन्तु हैं। वैद्य-मल्लाह चतुर है। राधा-सूर्य भगवान् निकल आये, पर तारे क्यों…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 59
यह कह कर राय साहब धीरे से उठे और चले गये। तब विद्या ग्लानि, लज्जा और नैराश्य से मर्माहत हो कर पलँग पर लेट गई और बिलख-बिलख कर रोने लगी। राय साहब के पहले आक्षेप का उसने प्रतिवाद किया था, पर इस दूसरे…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 58
लेकिन जब ज्ञानशंकर बनारस चले गये और उनकी चिट्ठियों का आना बिलकुल बन्द हो गया, तब गायत्री को ऐसा अनुभव होने लगा मानो मैं इस संसार में हूँ ही नहीं। या कोई दूसरा निर्जन, नीरव, अचेतन संसार है। उसे…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 57
मस्ता-भैया, यह न जाने कौन आदमी है। फाटक से चिपटा खड़ा था। अभी मैं फाटक बन्द करने गया तो इसे देखा। मुझे देखते ही और दबक गया। बस मैंने चुपके से आकर सबको साथ लिया और बच्चू को पकड़ लिया। जरूर से जरूर कोई…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 56
यह कहते-कहते बुढ़िया रोने लगी। प्रेमशंकर की आँखें भी भर गईं, पूछा-बिसेसर साह की क्या हाल है? बुढ़िया-क्या जानूँ भैया, मैंने तो साल भर से उसके द्वार पर झाँका भी नहीं। अब कोई उधर नहीं जाता। ऐसे आदमी का…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 55
सहसा डॉ. प्रियनाथ ने उच्च स्वर से कहा, अधमरा ही क्यों छोड़ दिया। एक लाठी और क्यों न जड़ दी कि काम तमाम हो जाता? मूर्यो! तुम्हारा अपराधी तो मैं था, 'इन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? यह कह कर वह…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 54
एकाएक भीतर से द्वार खुला और राय साहब बाहर निकले। उनका मुखड़ा रक्तवर्ण हो रहा था। आँखें भी लाल थीं, पसीने से तर थे माने कोई लोहार भट्ठी के सामने से उठ कर आया हो। दोनों थाल समेट कर एक जगह रख दिये गये थे।…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 53
ज्ञानशंकर स्नान करके जल से निकल आये। उनका चेहरा विजय-ज्योति से चमक रहा था। लेकिन जिस प्रकार विजयी सैना शत्रुदल को मैदान से हटा कर और भी उत्साहित हो जाती है और शत्रु को इतना निर्बल और अपंग बना देती…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 52
यह कह कर राय साहब ने ज्ञानशंकर को तीव्र नेत्रों से देखा। उनके सन्देह का निशाना - इतना ठीक बैठा था कि ज्ञानशंकर का हृदय काँप उठा। इस भ्रम का मूलोच्छेद करना परमाश्यक था। राय साहब के मन में इसका जगह…-
304.7 K • Completed
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Chapter
पाठ-खंड 51
गायत्री-उन्हें मजूरी दी जाती है न? ज्ञान-जी हाँ, लेकिन जमींदारी की दर से दी जाती है। जमींदारी शरह दो आने हैं, आम शरह छह आने हैं। गायत्री-आप उचित समझें तो रामसनेही को लिख दीजिए कि चार आने के हिसाब से…-
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Chapter
पाठ-खंड 61
गायत्री विस्मित हो कर विद्या का मुँह ताकने लगी। लेकिन ज्ञानशंकर मन में मुग्ध हुए जाते थे। दोनों बहिनों में वह जो भेद-भाव डालना चाहते थे वह आप में यहाँ अब आपको कष्ट होगा। क्यों न बैंगले में एक कमरा…-
304.7 K • Completed
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