168 Results with the "Social drama" genre
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Story
सेवासदन · Sevasadan
सुमन की कहानी के माध्यम से विवाह, सामाजिक प्रतिष्ठा और स्त्री की स्वतंत्रता पर एक मार्मिक उपन्यास। A searching portrait of marriage, respectability and a woman’s struggle for agency.-
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Chapter
अध्याय 1
पश्चाताप के कड़वे फल कभी-न-कभी सभी को चखने पड़ते हैं, लेकिन और लोक बुराइयों पर पछताते हैं, दारोगा कृष्णचन्द्र अपनी भलाइयों पर पछता रहे थे। उन्हें थानेदारी करते हुए पच्चीस वर्ष हो गए, लेकिन…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 2
दारोगाजी के हल्के में एक महंत रामदास रहते थे। वह साधुओं की एक गद्दी के महंत थे। उनके यहाँ सारा कारोगार 'श्री बांकेबिहारीजी' के नाम पर होता था 'श्री बांकेबिहारीजी' लेन-देन करते थे और 32 रू.…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 3
पंडित कृष्णचन्द्र रिश्वत लेकर उसे छिपाने के साधन न जानते थे। इस विषय में अभी नौसिखिए थे। उन्हें मालूम न था कि हराम का माल अकेले मुश्किल से पचता है। मुख्तार ने अपने मन में कहा, हमीं ने सब कुछ…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 4
कृष्णचन्द्र अपने कस्बे में सर्वप्रिय थे। यह खबर फैलते ही सारी बस्ती में हलचल मच गई। कई भले आदमी उनकी जमानत कराने आए, लेकिन साहब ने जमानत नहीं ली। इसके एक सप्ताह बाद कृष्णचन्द्र पर रिश्वत…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 5
फागुन में सुमन का विवाह हो गया। गंगाजली दामाद को देखकर बहुत रोई। उसे ऐसा दु:ख हुआ, मानो किसी ने सुमन को कुएं में डाल दिया। सुमन ससुराल आई तो यहाँ की अवस्था उससे भी बुरी पाई, जिसकी उसने कल्पना की…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 6
सुमन के घर के सामने भोली नाम की एक वेश्या का मकान था। भोली नित नए श्रृंगार करके अपने कोठे के छज्जे पर बैठती। पहर रात तक उसके कमरे से मधुर गान की ध्वनि आया करती। कभी-कभी वह फिटन पर हवा खाने जाया…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 7
सुमन को ससुराल आए डेढ़ साल के लगभग हो चुका था, पर उसे मैके जाने का सौभाग्य न हुआ था। वहाँ से चिट्ठियां आती थीं। सुमन उत्तर में अपनी मां को समझाया करती, मेरी चिंता मत करना, मैं बहुत आनंद से हूँ, पर अब…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 8
गजाधरप्रसाद की दशा उस मनुष्य की-सी थी, जो चोरों के बीच में अशर्फियों की थैली लिए बैठा हो। सुमन का वह मुख-कमल, जिस पर वह कभी भौंरे की भांति मंडराया करता था, अब उसकी आंखों में जलती हुई आग के समान था। वह…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 9
दूसरे दिन से सुमन ने चिक के पास खड़ा होना छोड़ दिया। खोंचेवाले आते और पुकार कर चले जाते। छैले गजल गाते हुए निकल जाते। चिक की आड़ में अब उन्हें कोई न दिखाई देता था। भोली ने कई बार बुलाया, लेकिन सुमन…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 10
दूसरे दिन सुमन नहाने न गई। सबेरे ही से अपनी एक रेशमी साड़ी की मरम्मत करने लगी। दोपहर को सुभद्रा की एक महरी उसे लेने आई। सुमन ने मन में सोचा था, गाड़ी आवेगी। उसका जी छोआ हो गया। वही हुआ जिसका उसे भय…-
178.8 K • Completed
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Chapter
अध्याय 11
दरवाजे पर आकर सुमन सोचने लगी कि अब कहां जाऊं। गजाधर की निर्दयता से भी उसे इतना दु:ख न हुआ था, जितना इस समय हो रहा था। उसे अब मालूम हुआ कि मैंनेअपने घर से निकलकर बड़ी भूल की। मैं सुभद्रा के बल पर कूद…-
178.8 K • Completed
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