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    168 Results with the "Social drama" genre


    • अध्याय 20 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सुभद्रा को संध्‍या के समय कंगन की याद आई। लपकी हुई स्‍नान-घर में गई। उसे खूब याद था कि उसने यहीं ताक पर रख दिया था, लेकिन उसका वहाँ पता न था। इस पर वह घबराई। अपने कमरे के प्रत्‍येक ताक और आलमारी को…
    • अध्याय 21 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — विट्ठलदास को संदेह हुआ कि सुमन तीस रुपये मासिक स्‍वीकार करना नहीं चाहती, इसलिए उसने कल उत्तर देने का बहाना करके मुझे टाला है। अतएव वे दूसरे दिन उसके पास नहीं गए, इसी चिंता में पड़े रहे कि शेष…
    • अध्याय 22 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सुमन पार्क से लौटी तो उसे खेद होने लगा कि मैंने शर्माजी को वे ही दुखानेवाली बातें क्‍यों कहीं? उन्‍होंने इतनी उदारता से मेरी सहायता की, जिसका मैंने यह बदला दिया? वास्‍तव में मैंने अपनी दुर्बलता का…
    • अध्याय 23 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सदन प्रात:काल घर गया, तो अपनी चाची के हाथ में कंगन देखा। लज्‍जा से उसकी आंखें जमीन में गड़ गईं। नाश्‍ता करके जल्‍दी से बाहर निकल आया और सोचने लगा, यह कंगन इन्‍हें कैसे मिल गया? क्‍या यह संभव है कि…
    • अध्याय 24 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — यह बात बिलकुल तो असत्‍य नहीं है कि ईश्‍वर सबको किसी-न-किसी हीले से अन्‍न-वस्‍त्र देता है। पंडित उमानाथ बिना किसी हीले ही के संसार का सुख-भोग करते थे। उनकी आकाशी वृत्ति थी। उनके भैंस और गाएं न थीं,…
    • अध्याय 25 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — सार्वजनिक संस्‍थाएं भी प्रतिभाशाली मनुष्‍य की मोहताज होती हैं। यद्यपि विट्ठलदास के अनुयायियों की कमी न थी, लेकिन उनमें प्राय: सामान्‍य अवस्‍था के लोग थे। ऊंची श्रेणी के लोग उनसे दूर भागते थे।…
    • अध्याय 26 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — रात के नौ बजे थे। पद्मसिंह भाई के साथ बैठे हुए विवाह के संबंध में बातचीत कर रहे थे। कल बारात जाएगी। दरवाजे पर शहनाई बज रही थी और भीतर गाना हो रहा था। मदनसिंह-तुमने जो गाड़ियां भेजी हैं; वह कल शाम तक…
    • अध्याय 27 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — बरसात के दिन थे, घटा छाई हुई थी। पंडित उमानाथ चुनारगढ़ के निकट गंगा के तट पर खड़े नाव की बाट जोह रहे थे। वह कई गांवों का चक्‍कर लगाते हुए आ रहे थे और संध्‍या होने से पहले चुनार के पास एक गांव में जाना…
    • अध्याय 28 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — पंडित उमानाथ सदनसिंह का फलदान चढ़ा आए हैं। उन्‍होंने जाह्नवी से गजानन्‍द की सहायता की चर्चा नहीं की थी। डरते थे कि कहीं यह इन रुपयों को अपनी लड़कियों के विवाह के लिए रख छोड़ने पर जिद्द न करने लगे।…
    • अध्याय 29 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — एक रोज उमानाथ ने कृष्‍णचन्‍द्र के सहचरों को धमकाकर कहा-अब तुम लोगों को उनके साथ बैठकर चरस पीते देखा तो तुम्‍हारी कुशल नहीं। एक-एक की बुरी तरह खबर लूंगा। उमानाथ का रोब सारे गांव पर छाया हुआ था। वे…
    • अध्याय 30 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — शहर की म्‍युनिसिपैलिटी में कुल अठारह सभासद थे। उनमें आठ मुसलमान थे और दस हिंदू। सुशिक्षित मेंबरों की संख्‍या अधिक थी, इसलिए शर्माजी को विश्‍वास था कि म्‍युनिसिपैलिटी में वश्‍याओं को नगर से बाहर…
    • अध्याय 31 Cover
      by प्रेमचंद · Premchand — इस प्रस्‍ताव के विरोध में हिंदू मेंबरों को जब मुसलमानों के जलसे का हाल मालूम हुआ तो उनके कान खड़े हुए। उन्‍हें मुसलमानों से जो आशा थी, वह भंग हो गई। कुल दस हिंदू थे। सेठ बलभद्रदास चेयरमैन थे।…
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