81 Results with the "Rural fiction" genre
-
Chapter
पाठ-खंड 47
चौधरी-दीनों पर दया करो और वहीं पुण्य तुम्हें गड्ढे से निकालेगा। दया ही सब मन्त्रों का मूल है। फैजू मियाँ गर्द झाड़ कर उठ बैठे थे। वृद्ध दुर्बल चौधरी उस समय उनकी आँखों में एक देव-सा दीख पड़ता था। यह…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 48
डॉक्टर-आप मुतलक अन्देशा न करें, मैंने मुकदमे को हाथ में ले लिया। अपने दीवान साहब को भेज दीजिएगा, वकालतनामा तैयार हो जायगा। मैं कागजात देखकर फौरन दावा दायर कर दूँगा। गोरखपुर गया तो आपके कागजात…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 49
अमजद-मैंने तो कसम खा ली है। ईजाद-अरे मियाँ कैसी बातें करते हो? ऐसी कस्में दिन में सैकड़ों बार खाया करते हैं। जाइए देखिए, फिर कोई शैतान आया है। मियाँ अमजद नीचे आये तो सचमुच एक शैतान खड़ा था। ठिगना कद,…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 50
पंडित जी ने अपना रंग जमते न देखा तो अपनी वक्तृता समाप्त कर दी और जगह पर आ बैठे। श्रोताओं ने समझा अब इत्तहादियों के राग सुनने में आयेंगे। सबने कुर्सियाँ आगे खिसकायीं और सावधान हो बैठे किन्तु…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 51
गायत्री-उन्हें मजूरी दी जाती है न? ज्ञान-जी हाँ, लेकिन जमींदारी की दर से दी जाती है। जमींदारी शरह दो आने हैं, आम शरह छह आने हैं। गायत्री-आप उचित समझें तो रामसनेही को लिख दीजिए कि चार आने के हिसाब से…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 39
यही बातें हो रही थीं कि फैजू और कर्तारसिंह ने सामने आकर सलाम किया। ज्ञानशंकर ने पूछा, कहो खैरियत तो है। फैजू-हुजूर, खैरियत क्या कहें! रात को किसी ने खाँ साहब को मार डाला। ईजाद हुसेन और इर्फान अली…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 38
खेत में पहुँचकर दोनों मचान पर लेटे। अमावस की रात थी। आकाश पर कुछ बादल भी हो आये थे। चारों ओर घोर अन्धकार छाया हुआ था। मनोहर तो लेटते ही खर्राटे लेने लगा; लेकिन बलराज पड़ा-पड़ा करवटें बदलता रहा।…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 37
बिन्दा-होवे करी तो कौनो डर हौ। अबकी अस जर आवा है कि ठठरी होय गया है। कर्तार-बड़े कस-बल का पट्ठा है। सुक्खू चौधरी का तालाब जहाँ बन रहा था वहीं एक दिन अखाड़े में उससे मेरी एक पकड़ हो गई थी। मैं उसे पहले…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 36
पहला अंक राजा-हाय! हाय! बैद्यो ने जवाब दिया, हकीमों ने जवाब दिया, डाकदरों ने जवाब दिया, किसी ने रोग को न पहचाना। सब-के-सब लुटेरे थे। अब जिन्दगानी की कोई आशा नहीं। यह सारा राज-पाट छूटता है। मेरे पीछे…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 35
प्रेमशंकर-मुझे नहीं मालूम था कि गरीबों को जूते लगवाना भी सरकारी काम है। इसने क्या खता की थी, जिसके लिए आपने यह सजा तजवीज की? तहसीलदार-सरकारी हुक्म की तामील से इन्कार किया। इससे कहा गया था कि इस…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 34
सबने अलग-अलग और फिर मिलकर सुक्खू को समझाया; लेकिन वह टस से मस न हुए। अन्त में लोगों ने कादिर को घेरा। नूर आलम ने उन्हें अलग से जाकर कहा, खाँ साहब, इस बूढ़े का जरा समझाओ, क्यों जान देने पर तुला हुआ है? दो…-
304.7 K • Completed
-
-
Chapter
पाठ-खंड 33
ज्ञान-इसका कारण यही है कि हम भीरु प्रकृति के हैं, यथार्थ का सामना न करके मिथ्या आदर्श-प्रेम की आड़ में अपनी कमजोरी छिपाते हैं। गायत्री-मैंने आपका आशय नहीं समझा। ज्ञान-मेरा आशय केवल यही है कि…-
304.7 K • Completed
-
- Previous 1 … 3 4 5 … 7 Next